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कबीर दास जी के दोहे! | Kabir Das Dohe #6

दोहा 1 - 
जो उग्या सो अन्तबै, फूल्या सो कुमलाहीं।
जो चिनिया सो ढही पड़े, जो आया सो जाहीं।।

कबीर कहना चाहते हैं - 
इस संसार का नियम यही है कि जो उदय हुआ है,वह अस्त होगा। जो विकसित हुआ है वह मुरझा जाएगा। जो चिना गया है वह गिर पड़ेगा और जो आया है वह जाएगा।


दोहा 2 - 
तिनका कबहुँ ना निन्दिये, जो पाँवन तर होय।
कबहुँ उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय।।

कबीर कहना चाहते हैं - 
एक छोटे से तिनके की भी कभी निंदा न करो, जो हमारे पांवों के नीचे दब जाता है। क्योंकि यदि वही तिनका उड़कर आँख में आ गिरे, तो हमें उससे गहरी पीड़ा होती है।


दोहा 3 - 
धीरे-धीरे रे मना, धीरे सब कुछ होय।
माली सींचे सौ घड़ा, ॠतु आए फल होय।।

कबीर कहना चाहते हैं - 
मन में धीरज रखने से (मतलब सब्र के साथ काम करने से) सब कुछ होता है। अगर कोई माली किसी पेड़ को सौ घड़े पानी से सींचने लगे, तब भी फल तो ऋतु आने पर ही लगेगा।


आशा करती हूं आपको कबीर के दोहे पसंद आए होंगे। अगर आप लोगों के पास भी उनके दोहे हैं या आप हमारी साइट पर किसी और के दोहे पढ़ना चाहते हैं, तो हमें नीचे कमेंट सेक्शन में लिखकर जरूर बताएं। हम जल्दी ही एक नई कहानी के साथ आपसे मिलते हैं, तब तक अपना ध्यान रखें और खुश हुई।

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