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अमात्य की कहानी | 10th Story | अलिफ लैला

प्राचीन समय में एक राजा था उसके राजकुमार को मृगया का बड़ा शौक था। राजा उसे बहुत चाहता था, राजकुमार की किसी इच्छा को अस्वीकार नहीं करता था। एक दिन राजकुमार ने शिकार पर जाना चाहा। राजा ने अपने एक अमात्य को बुलाकर कहा कि राजकुमार के साथ चले जाओ, तुम्हें सब रास्ते मालूम हैं, राजकुमार को नहीं मालूम, इसलिए एक क्षण के लिए भी राजकुमार का साथ न छोड़ना।

अमात्य की कहानी | 10th Story | अलिफ लैला

भद्र पुरुष और उसके तोते की कहानी | 9th Story | अलिफ लैला

पूर्वकाल में किसी गाँव में एक बड़ा भला मानस रहता था। उसकी पत्नी अतीव सुंदरी थी और भला मानस उससे बहुत प्रेम करता था। अगर कभी घड़ी भर के लिए भी वह उसकी आँखों से ओझल होती थी तो वह बेचैन हो जाता था।

भद्र पुरुष और उसके तोते की कहानी | 9th Story | अलिफ लैला

गरीक बादशाह और हकीम दूबाँ की कथा | 8th Story | अलिफ लैला

दैत्य ने यह पूछने पर कि यह कहानी क्या है, मछुवारे ने कहना शुरू किया। कहानी का नाम था - गरीक बादशाह और हकीम दूबाँ की कहानी!

फारस देश में एक रूमा नामक नगर था। उस नगर के बादशाह का नाम गरीक था। उस बादशाह को कुष्ठ रोग हो गया। इससे वह बड़े कष्ट में रहता था। राज्य के वैद्य-हकीमों ने भाँति-भाँति से उसका रोग दूर करने के उपाय किए किंतु उसे स्वास्थ्य लाभ नहीं हुआ। संयोगवश उस नगर में दूबाँ नामक एक हकीम का आगमन हुआ। वह चिकित्सा शास्त्र में अद्वितीय था, जड़ी-बूटियों की पहचान उससे अधिक किसी को भी नहीं थी। इसके अतिरिक्त वह प्रत्येक देश की भाषा तथा यूनानी, अरबी, फारसी इत्यादि अच्छी तरह जानता था।
गरीक बादशाह और हकीम दूबाँ की कथा | 8th Story | अलिफ लैला

मछुवारे की कहानी | 7th Story | अलिफ लैला

किस्सा मछुवारे का!

शहरजाद ने कहा कि हे स्वामी, एक वृद्ध और धार्मिक प्रवृत्ति का मुसलमान मछुवारा मेहनत करके अपने स्त्री-बच्चों का पेट पालता था। वह नियमित रूप से प्रतिदिन सवेरे ही उठकर नदी के किनारे जाता और चार बार नदी में जाल फेंकता था। एक दिन सवेरे उठकर उसने नदी में जाल डाला। उसे निकालने लगा तो जाल बहुत भारी लगा। उसने समझा कि आज कोई बड़ी भारी मछली हाथ आई है लेकिन मेहनत से जाल दबोच कर निकाला तो उसमें एक गधे की लाश फँसी थी। वह उसे देखकर जल-भुन गया, उसका जाल भी गधे के बोझ से जगह-जगह फट गया था।

मछुवारे की कहानी | 7th Story | अलिफ लैला

तीसरे बूढ़े और उसके खच्चर की कहानी | 6th Story | अलिफ लैला

किस्सा तीसरे बूढ़े का जिसके साथ एक खच्चर था!!

तीसरे बूढ़े ने कहना शुरू किया! हे दैत्य सम्राट, यह खच्चर मेरी पत्नी है!! मैं व्यापारी था। एक बार मैं व्यापार के लिए परदेश गया। जब मैं एक वर्ष बाद घर लौटकर आया तो मैंने देखा कि मेरी पत्नी एक हब्शी गुलाम के पास बैठी हास-विलास और प्रेमालाप कर रही है। यह देखकर मुझे अत्यंत आश्चर्य और क्रोध हुआ और मैंने चाहा कि उन दोनों को दंड दूँ। तभी मेरी पत्नी एक पात्र में जल ले आई और उस पर एक मंत्र फूँक कर उसने मुझ पर अभिमंत्रित जल छिड़क दिया जिससे मैं कुत्ता बन गया। पत्नी ने मुझे घर से भगा दिया और फिर अपने हास-विलास में लग गई।

तीसरे बूढ़े और उसके खच्चर की कहानी | 6th Story | अलिफ लैला

दूसरे बूढ़े और उसके दो काले कुत्तोँ की कहानी | 5th Story | अलिफ लैला

किस्सा दूसरे बूढ़े का जिसके पास दो काले कुत्ते थे!!

दूसरे बूढ़े ने कहा, हे दैत्यराज! ये दोनों काले कुत्ते मेरे सगे भाई हैं। हमारे पिता ने मरते समय हम तीनों भाइयों को तीन हजार अशर्फियाँ दी थीं। हम लोग उन मुद्राओं से व्यापार चलाने लगे। मेरे बड़े भाई को विदेशों में जाकर व्यापार करने की इच्छा हुई सो उसने अपना सारा माल बेच डाला और जो वस्तुएँ विदेशों में महँगी बिकती थीं उन्हें यहाँ से खरीद कर व्यापार को चल दिया। 

दूसरे बूढ़े और उसके दो काले कुत्तोँ की कहानी | 5th Story | अलिफ लैला

पहले बूढ़े और उसकी हिरनी की कहानी | 4th Story | अलिफ लैला

हिरनी वाले बूढ़े ने कहानी सुनाना शुरू की!!

वृद्ध बोला, "हे दैत्यराज, अब ध्यान देकर मेरा वृत्तांत सुनें।" यह हिरनी मेरे चचा की बेटी और मेरी पत्नी है। जब यह बारह वर्ष की थी तो इसके साथ मेरा विवाह हुआ। यह अत्यंत पतिव्रता थी और मेरे प्रत्येक आदेश का पालन करती थी। किंतु जब विवाह को तीस वर्ष हो गए और इससे कोई संतान नहीं हुई तो मैंने एक दासी मोल ले ली क्योंकि मुझे संतान की अति तीव्र अभिलाषा थी। 

बूढ़े और उसकी हिरनी की कहानी | 4th Story | Alif Lalia

व्यापारी और दैत्य की कहानी | 3rd Story | अलिफ लैला

शहरजाद ने कहानी सुनाना शुरू की!!

प्राचीन काल में एक अत्यंत धनी व्यापारी बहुत-सी वस्तुओं का कारोबार किया करता था। यद्यपि प्रत्येक स्थान पर उसकी कोठियाँ, गुमाश्ते और नौकर-चाकर रहते थे, तथापि वह स्वयं भी व्यापार के लिए देश-विदेश की यात्रा किया करता था। 
एक बार उसे किसी विशेष कार्य के लिए अन्य स्थान पर जाना पड़ा। वह अकेला घोड़े पर बैठ कर चल दिया। गंतव्य स्थान पर खाने-पीने को कुछ नहीं मिलता था, इसलिए उसने एक खुर्जी में कुलचे और खजूर भर लिए। 

व्यापारी और दैत्य की कहानी | 3rd Story | Alif Lalia

गधे, बैल और उनके मालिक की कहानी | शहरयार और शहरजाद की शादी | 2nd Story | अलिफ लैला

एक बड़ा व्यापारी था जिसके गाँव में बहुत-से घर और कारखाने थे जिनमें तरह-तरह के पशु रहते थे। एक दिन वह अपने परिवार सहित कारखानों को देखने के लिए गाँव गया। उसने अपनी पशुशाला भी देखी जहाँ एक गधा और एक बैल बँधे हुए थे। उसने देखा कि वे दोनों आपस में वार्तालाप कर रहे हैं। वह व्यापारी पशु-पक्षियों की बोली समझता था। वह चुपचाप खड़ा होकर दोनों की बातें सुनने लगा।

गधे, बैल और उनके मालिक की कहानी | शहरयार और शहरजाद की शादी

शहरयार और शाहजमाँ की कहानी | अलिफ लैला की प्रारम्भ की कहानी | 1st Story | अलिफ लैला

आइए जानते हैं कैसे प्रारम्भ हुई अलिफ लैला की कहानियां!

फारस देश भी हिंदुस्तान और चीन के समान था और कई नरेश उसके अधीन थे। वहाँ का राजा महाप्रतापी, बड़ा तेजस्वी था और न्यायप्रिय होने के कारण प्रजा को प्रिय था। उस बादशाह के दो बेटे थे जिनमें बड़े लड़के का नाम शहरयार और छोटे लड़के का नाम शाहजमाँ था। दोनों राजकुमार गुणवान, वीर धीर और शीलवान थे।

शहरयार और शाहजमाँ की कहानी | अलिफ लैला की प्रारम्भ की कहानी