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देखने वालों की सोच | Inspirational Story

काजल एक प्यारी सी 8 साल की लड़की थी। वह स्वभाव से हंसमुख और गुणवंती थी। नए विद्यालय में काजल का प्रवेश हुआ और पहले दिन विद्यालय जाने के लिए वह काफी उत्सुक थी।
परंतु पहला दिन उसके लिए निराशाजनक रहा। किसी भी विद्यार्थी ने उससे बात नहीं की और ना ही कोई उससे घुला-मिला। कुछ समय विद्यालय में यूं ही चलता रहा।


काजल सांवले रंग की थी, जिसके कारण कुछ बच्चे उसके सांवले रंग का मजाक उड़ाते थे। पर कुछ बच्चे ऐसे भी थे जो उसके कोमल मन को पहचानते थे इसलिए शीघ्र ही उसके दोस्त बन गए।
कुछ बच्चों के बुरे बर्ताव के कारण काजल उदास रहने लगी और उसको यह बात खटकने लगी थी कि वह सांवली है

एक दिन उसकी मां उसके बाल सवार रही थी। काजल ने अपने आप को शीशे में देखते हुए कहा, "क्या मैं बदसूरत हूं?" उसकी मां ने यह सुनकर काजल को गले से लगा लिया और रो पड़ी। कुछ मिनट में मां ने अपने आप को संभाला और काजल से कहा, "बिल्कुल नहीं! तुम बहुत खूबसूरत हो!! खूबसूरती देखने वालों की आंखों में होती है। सावला रंग बेहद खूबसूरत और खास होता है। अपने आप को किसी से भी कम ना समझना। किसी भी इंसान की पहचान उसके गुणों से होती है ना कि उसके रंगिया रूप से। गुणों के आगे रंग की पहचान छिप जाती है।"

मां काजल को पूचकारने लगी और बगीचे में घुमाने ले गई। काजल ने अपनी मां की बातों को समझा। छोटी सी उम्र में उसने जिंदगी की सच्चाई को समझ लिया था। कुछ वर्ष पश्चात काजल को यह आत्मविश्वास था कि वक्त के साथ-साथ वह इस रंग रूप के भेदभाव को एक दिन समाज से दूर जरूर करेगी।

शिक्षा - 


प्यारे दोस्तों! "किसी के साथ भी शारीरिक रंग या रूप पर भेदभाव नहीं करना चाहिए। रंग रूप के आधार पर भेदभाव करना एक अपराध है। इससे मानव जाति की बहुत क्षति होती है।" 

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Story By - Rima Bose
Post By - Khushi

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