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सोनू शेर को आई समझ | Kids Moral Story

एक छोटे से जंगल में सोनू नाम का शेर राज करता था। सोनू शेर ज्यादा होशियार नहीं था, वह आसानी से सबकी बातों में आ जाता था और कई बार बिना सोचे समझे कोई भी निर्णय ले लेता था।

उसी जंगल में बंदर, हाथी, जिराफ़, ज़ेबरा, पांडा और अन्य जानवर रहते थे। हाथी और जिराफ़ बाकी सभी जानवरों के मुकाबले होशियार थे। सभी जानवर मिल जुल कर रहते थे। हर रात सारे जानवर एक साथ मिलकर पार्टी करते और ढेर सारी बातें करते।


एक रात जब सब जानवर मिलकर बातें कर रहे थे तब ही टिंकू बंदर ने सब को बताया कि आज सुबह वह पास के गांव गया था, जहां उसने देखा कि वहां के राजा, हाथी के ऊपर आसन लगाकर उस पर बैठे हुए थे और पूरे गांव में घूम रहे थे। उस पर पो पांडा बोला, "हां मैंने देखा है, जब भी राजा की सवारी जाती है तो वह अक्सर हाथी के ऊपर आसन लगा कर बैठते हैं। सिर्फ राजा ही ऐसा कर सकते हैं। बाकी लोगों को पैदल चलना पड़ता है।"

यह सब बातें सोनू शेर ध्यान से सुन रहा था, उसने उस वक्त तो कुछ नहीं कहा और वहां से चला गया। रात भर वह सो नहीं पाया। उसने सोचा कि अगर इंसानों में जो राजा होता है, वह हाथी के ऊपर आसन लगाता बैठता है, तो मैं भी तो जंगल का राजा हूं, मुझे भी ऐसा ही करना चाहिए। उसने तय कर लिया कि अब वह भी हाथी के ऊपर आसन लगाकर पूरे जंगल की सैर करेगा।

अगली सुबह सोनू शेर ने सभा बुलाई। जंगल के सारे जानवर इकट्ठे हो गए। सोनू शेर ने सब को कहा, "मैंने यह तय किया है कि आज से मैं भी हाथी के ऊपर आसन लगाकर जंगल की पूरी सैर करूंगा। जैसे इंसान करते हैं, अगर वह कर सकते हैं तो मैं भी जंगल का राजा हूं।"

शेर की बातें सुनकर जंगल के सभी जानवर आश्चर्यचकित हो गए। उन सब में मोनू हाथी और रामू जिराफ़ सबसे समझदार थे। उन्होंने सोनू शेर को समझाते हुए कहा, "इंसानों में और जानवरों में अंतर होता है। उन्हें आसन में बैठने की आदत होती है, वह अपने घर पर भी सोफा और कुर्सी का इस्तेमाल करते हैं। जबकि हम जंगल में इन चीजों का इस्तेमाल नहीं करते। समझदारी यही होगी कि हम उनकी नकल ना करें।"

इतना समझाने के बाद भी सोनू शेर नहीं माना। उसने ज़िद पकड़ ली कि वह हाथी के ऊपर आसन लगाकर बैठेगा। सभी जानवर समझ गए थे कि अब शेर मानने वाला नहीं है इसलिए उन्होंने वही किया जो सोनू शेर ने उनसे करने के लिए कहां था।

मोनू हाथी के ऊपर एक सुंदर सा आसन लगाया गया और सोनू शेर उसके ऊपर बैठा। सोनू शेर की खुशी का ठिकाना नहीं था। उसने मोनू हाथी को जंगल की सैर करवाने का आदेश दिया। जैसे ही मोनू हाथी चलने के लिए हिला, सोनू शेर आसन के ऊपर से सरक गया और नीचे धड़ाम से जाकर गिरा। नीचे गिरने के कारण उसे चोट लग गई।

सब ने शेर को समझाया कि आसन पर बैठने का काम इंसानों का होता है, जानवरों का नहीं! पर फिर भी सोनू शेर नहीं माना। उसने एक बार फिर जाकर मोनू हाथी के ऊपर लगे आसन पर बैठने की कोशिश की। फिर से जैसे ही मोनू हाथी ने चलने की कोशिश की, सोनू शेर एक बार फिर से आसन से सरक कर धड़ाम से नीचे गिर गया। इस बार गिरने के कारण उसकी एक टांग टूट गई। उसे काफी चोट लग गई।

सोनू शेर को अब यह बात समझ में आ गई थी कि आसन पर जानवर नहीं बैठते। उसे अफसोस हो रहा था कि काश उसने पहले ही हाथी और जिराफ़ की बात मानी होती तो आज उसकी टांग नहीं टूटती। उसने कसम खा ली कि आज से वह कभी भी किसी की नकल नहीं करेगा और बिना सोचे समझे कोई काम नहीं करेगा।

शिक्षा - 


प्यारे दोस्तों! "जिस तरह सोनू शेर बिना सोचे समझे दूसरों की नकल करने के चक्कर में अपने टांग तोड़-वा लेता है। ठीक उसी तरह कुछ लोग बिना सोचे समझे कोई भी निर्णय ले लेते हैं और बाद में उसका भुगतान करना पड़ता है। किसी भी निर्णय को लेने से पहले उसके बारे में पूरी जानकारी लें और बिना सोचे समझे कभी भी किसी को देखकर उसकी नकल ना करें।" 

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Story By - Khushi
Post By - Khushi

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