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लक्ष्मी, सरस्वती और गंगा का परस्पर श्राप देना | Mythological Story

आज हम आपको एक बहुत ही प्रचलित पौराणिक कथा सुनाने जा रहे हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार भगवान विष्णु की तीन पत्नियाँ- लक्ष्मी, गंगा और सरस्वती थीं। एक बार विष्णुजी ने गंगा के प्रति विशेष अनुराग और लगाव दिखाया जिसके फलस्वरूप सरस्वती के मन में ईर्ष्या भाव उत्पन्न हो गया। सरस्वती, तीनों पत्नियों के प्रति समान अनुरक्ति रखने के आर्योचित सिद्धांत की उपेक्षा करके गंगा के प्रति आसक्ति दिखाने के लिए अपने पति विष्णुजी को खरी-खोटी बातें सुनाने लगीं। सरस्वती ने गंगा को भी आड़े हाथों लेकर दुर्वचन कहे।


कहानी बालक ध्रुव के ध्रुव तारा बनने की | Mythological Story

आज हम आपको बालक ध्रुव की कहानी सुनाने जा रहे हैं।

स्वयंभुव मनु और शतरुपा के दो पुत्र थे - प्रियवत और उत्तानपाद। उत्तानपाद की सुनीति और सुरुचि नामक दो पत्नियां थीं। राजा उत्तानपाद को सुनीति से ध्रुव और सुरुचि से उत्तम नामक दो पुत्र उत्पन्न हुए। यद्पि सुनीति बड़ी रानी थी परन्तु उत्तानपाद का प्रेम सुरुचि के प्रति अधिक था। एक बार सुनीति का पुत्र ध्रुव अपने पिता की गोद में बैठा खेल रहा था। इतने में सुरुचि वहां आ पहुंची।

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लक्ष्मी जी और साहूकार की बेटी की कथा | Mythological Story

आज हम आपके साथ एक ऐसी कथा शेयर करने जा रहे हैं जो दिवाली की पूजा पर और लक्ष्मी जी के त्योहारों पर अक्सर पढ़ी जाती है। आइए पढ़ते हैं!

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कैसे शेर माँ दुर्गा का वाहन बना? | Mythological Story

नवरात्रि आने वाली है, चलिए आज हम आपको ऐसे अवसर पर एक धार्मिक कहानी सुनाते हैं।

पौराणिक कथा के अनुसार, माँ पार्वती नें भगवान शिव को पाने के लिए कठोर तपस्या की थी। हजारों वर्षों तक चली इस कठोर तपस्या के फल स्वरूप माँ पार्वती नें शिवजी को तो पा लिया, पर तप के प्रभाव से वह खुद सांवली पड़ गयी।

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कैसे बने गणेश जी बुद्धि के देवता | Mythological Story

एक बार की बात है, सभी देवता बहुत ही मुश्किल में थे। सभी देव गण शिवजी के शरण में अपनी मुश्किलों के हल के लिए पहुंचे। उस समय भगवान शिवजी के साथ गणेश और कार्तिकेय भी वहीँ बैठे थे।

देवताओं की मुश्किल को देखकर शिवजी नें गणेश और कार्तिकेय से प्रश्न पुछा, 'तुममें से कौन देवताओं की मुश्किलों को हल करेगा और उनकी मदद करेगा।' दोनों भाई देवताओं की मदद करना चाहते थे इसलिए शिवजी नें उनके सामने एक प्रतियोगिता रखें। इस प्रतियोगिता के अनुसार दोनों भाइयों में जो भी सबसे पहले पृथ्वी की परिक्रमा करके लौटेगा वही देवताओं की मुश्किलों को हल करने में मदद करेगा।

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यशोदा मां ने देखा कृष्ण के मुँह में संपूर्ण ब्रह्मांड | जन्माष्टमी स्पेशल | Mythological Story

जन्माष्टमी आने वाली है, इस अवसर पर हम आपको आज कृष्ण भगवान जी की एक प्रचलित कहानी सुनाने जा रहे हैं।

एक सुबह कृष्ण अपने मित्रों के संग खेल रहे थे। बलराम ने देखा कि कृष्ण ने मिट्टी खा ली है। वे और उनके मित्र माँ यशोदा से इसकी शिकायत करने पहुँचे। बलराम ने कहा, "जल्दी चलो माँ, कृष्णा ने मिट्टी खा रहा है।"

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गणेश जी के टूटे दांत की कहानी | Mythological Story

जब महर्षि वेदव्यास महाभारत लिखने के लिए बैठे, तो उन्हें एक ऐसे व्यक्ति की जरूरत थी, जो उनके मुख से निकले हुए महाभारत की कहानी को लिखे। इस कार्य के लिए उन्होंने श्री गणेश जी को चुना।

गणेश जी भी इस बात के लिए मान गए पर उनकी एक शर्त थी कि पूरा महाभारत लेखन को एक पल ले लिए भी बिना रुके पूरा करना होगा। गणेश जी बोले – "अगर आप एक बार भी रुकेंगे तो मैं लिखना बंद कर दूंगा।"

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महाशिवरात्रि की कथा | Mythological Story

एक बार पार्वती जी ने भगवान शिवशंकर से पूछा, "ऐसा कौन सा श्रेष्ठ तथा सरल व्रत-पूजन है, जिससे मृत्यु लोक के प्राणी आपकी कृपा प्राप्त कर लें?"
उत्तर में शिवजी ने पार्वती को "शिवरात्रि" के व्रत का विधान बताकर यह कथा सुनाई -

एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधवश साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया। संयोग से उस दिन शिवरात्रि थी।


नारद जी की समस्या | Mythological Story

एक बार देवर्षि नारद अपने पिता ब्रम्हा जी के सामने “नारायण-नारायण” का जप करते हुए उपस्थित हुए और पूज्य पिताजी को दंडवत प्रणाम किया। नारद जी को सामने देख ब्रम्हा जी ने पुछा, “नारद! आज कैसे आना हुआ? तुम्हारे मुख के भाव कुछ कह रहे हैं! कोई विशेष प्रयोजन है अथवा कोई नई समस्या?”

नारद जी ने उत्तर देते हुए कहा, “पिताश्री ऐसा कोई विशेष प्रयोजन तो नहीं है, कई दिनों से एक प्रश्न मन में खटक रहा है। आज आपसे इसका उत्तर जानने के लिए उपस्थित हुआ हूँ।”



जब माता दुर्गा जी ने तोड़ा देवताओं का घमंड | Mythological Story

एक बार देवताओं और दैत्यों में भयंकर युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में देवता विजयी हुए जिससे उनके मन में अहंकर उत्पन्न हो गया। सभी देवता स्वयं को श्रेष्ठ कहने लगे। जब माता दुर्गा ने देवताओं को इस प्रकार अहंकार से ग्रस्त होते देखा तो वे तेजपुंज के रूप में देवताओं के समक्ष प्रकट हुई। इतना विराट तेजपुंज देखकर देवता भी घबरा गए।

कैसे मिले गणेश जी अपनी सवारी मूषक से | Mythological Story

बहुत समय पहले की बात है, एक बहुत ही भयंकर असुर राजा था जिसका नाम था गजमुख। वह बहुत ही शक्तिशाली बनना चाहता था और साथ ही बहुत सारा धन प्राप्त करना चाहता था। इसके साथ वह सभी देवी देवताओं को अपने वश में करना चाहता था और सब पर राज करना चाहता था।

इस कारण से उसने भगवान शिवजी की तपस्या करने का निश्चय किया। ताकि शिवजी खुश होकर उसे  उसका मन चाहा वरदान दे।
शिवजी से वरदान प्राप्त करने के लिए उसने अपना राज्य छोड़ दिया और जंगल में जाकर तपस्या करने लगा। तपस्या करने के लिए उसने भोजन लेना और पानी पीना भी बंद कर दिया।

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भगवान श्रीकृष्ण के जन्म की कहानी | Mythological Story

हमारे देश में जन्माष्टमी बहुत धूमधाम से मनाई जाती है। इस दिन श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ था। इस दिन व्रत किया जाता है, खूब सारे व्रत के पकवान बनाए जाते हैं, मंदिर और घरों में पूजा की जाती है और उत्सव मनाया जाता है।

इस दिन मंदिरों में और घरों में एक दूसरे को भगवान श्री कृष्ण के जन्म की कहानी भी सुनी जाती है। आज हम आपको भी यह कहानी बताएंगे।

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रक्षाबंधन से संबंधित पौराणिक कहानियां | Mythological Story

हमारे यहां पर रक्षाबंधन सालों से मनाया जा रहा है। इस दिन बहन अपने भाई को राखी बांधती है और साथ में मिठाई और नारियल देकर उसे तिलक करती है। बहन अपने भाई की लंबी उम्र के लिए प्रार्थना करती है। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा करने का वादा करता है और उससे प्यार और तोहफा देता है। यह त्यौहार भाई और बहन के प्यार को दर्शाता है।

रक्षाबंधन की शुरुआत कब से हुई इसकी कोई निश्चित जानकारी तो नहीं है परंतु पुराणों में ऐसी बहुत   सारी कहानियां है जो रक्षाबंधन के पर्व को बताती है। आज हम आपसे ऐसी ही कुछ पौराणिक कहानियां शेयर करेंगे।


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रक्षाबंधन से संबंधित पौराणिक कहानियां

गणेश जी का जन्म | Mythological Story

एक दिन पार्वती माता को स्नान करने जाना था। परंतु वहां पर कोई भी रखवाली के लिए नहीं था। इसलिए उन्होंने स्वयं ही चंदन के लेप द्वारा एक बालक को उत्पन्न किया। माता पार्वती ने उस बालक का नाम गणेश रखा और साथ ही उसे अपना पुत्र माना।

माता पार्वती ने गणेश जी को आदेश दिया कि "मैं स्नान करने जा रही हूं। जब तक मैं स्नान करके ना आऊं, मेरी अनुमति के बिना तुम किसी को भी घर के अंदर मत आने देना।"

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अन्धी बुढिया की चतुराई से गणेशजी हुए प्रसन्न | Mythological Story

आज हम जो कहानी शेयर कर रहे हैं यह गणेश जी की बहुत ही प्रसिद्ध कहानी है। इससे ना सिर्फ कहानी के रूप में बल्कि कई व्रत में कथा के रूप में भी सुनाया जाता है।

एक अन्धी बुढिया थी जिसका एक लड़का और बहु थी। वो बहुत गरीब था। वह अन्धी बुढिया नित्यप्रति गणेश जी की पूजा किया करती थी। गणेश जी साक्षात् सन्मुख आकर कहते थे कि बुढिया माँ तू जो चाहे सो मांग ले| बुढिया कहती है, मुझे मांगना नहीं आता तो कैसे और क्या मांगू। तब गणेश जी बोले कि अपने बहु बेटे से पूछकर मांग ले।

तब बुढिया ने अपने पुत्र और बहू से पूछा तो बेटा बोला कि धन मांग ले और बहु ने कहाँ की पोता मांग लें । तब बुढिया ने सोचा कि यह तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे है।अतः इस बुढिया ने पड़ोसियों से पूछा तो, पड़ोसियों ने कहा कि बुढिया तेरी थोड़ी सी जिंदगी है। क्यूँ मांगे धन और पोता, तू तो केवल अपने नेत्र मांग ले जिससे तेरी शेष जिंदगी सुख से व्यतीत हो जाए।

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वैभव लक्ष्मी व्रत कथा | Mythological Story

यह कहानी जो मैं आज आपके साथ शेयर कर रही हूं, यह वास्तव में एक कथा है जो कि वैभव लक्ष्मी व्रत में पढ़ी जाती है। बचपन से ही मेरी माँ हर शुक्रवार को यह व्रत करती थी और यह कहानी पढ़ती थी  इस कारण से आज भी यह कहानी मेरे लिए बहुत ही विशेष है। हमने इस कहानी में कोई भी परिवर्तन नहीं किया है, जैसा पुस्तक में दी हुई थी एकदम वैसी की वैसी ही यह कहानी हमने लिखी है।

एक बड़ा शहर था। इस शहर में लाखों लोग रहते थे। पहले के जमाने के लोग साथ-साथ रहते थे और एक दूसरे के काम आते थे। पर नये जमाने के लोगों का स्वरूप ही अलग सा है। सब अपने अपने काम में मग्न रहते हैं। किसी को किसी की परवाह नहीं। घर के सदस्यों को भी एक-दूसरे की परवाह नहीं होती। भजन-कीर्तन, भक्ति-भाव, दया-माया, परोपकार जैसे संस्कार कम हो गये हैं। शहर में बुराइयाँ बढ़ गई थी। शराब, जुआ, रेस, व्यभिचार, चोरी-डकैती आदि बहुत से अपराध शहर में होते थे।

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